(गांव शाहपुर कंडी के पास रावी नदी के किनारे बनी धक्का कालौनी की इमारतें)
पंजाब जल सत्रोत विभाग की ओर से किया 11 सदस्यीय टीम का जांच के लिये गठन
संवाददाता सहयोगी 6283622953 जुगियाल / पठानकोट(के.के हैप्पी) : बहु उदेश्य 600 मैगावाट रणजीत सागर बांध परियोजना की 206 मैगावाट परियोजना हर समय सुरखियों मे रही है और समय समय पर इस के निर्माण के लिये अड़चनों का चोली दामन का साथ रहा है जिस कारण इस परियोजना के निर्माण के लिये केंद्र सरकार ने हस्ताक्षेप कर इस को केंद्रीय परियोजना घोषित कर दिया था। अब इस का निर्माण कार्य सोमा कंपनी की ओर से किया जा रहा है जो वर्ष 2022 मे पूरा हो जाये गा। इस से पहले शाहपुर कंडी बांध परियोजना को मुक्तेश्वर धाम को बचाने के इलावा शाहपुर कंडी बांध झील के लिये लगभग रावी दरिया के किनारे लगभग 25 ऐकड़ जमीन को खली करवाना बांध प्रशासन के गले की हडडी बना हुआ है। क्यों कि शाहपुर कंडी बांध परियोजना की ओर से रणजीत सागर बांध परियोजना से शाहपुर कंडी गांव और गांव अदियाल से माधोपुर तक शाहपुर कंडी बांध परियोजना और शाहपुर कंडी झील के बनने के लिये अधिगृह कर ली है पर इस के भीतर शाहपुर कंडी गांव के निकट लगभग 25 ऐकड़ जमीन को अधिगृह करने के लिये बांध प्रशासन और राजस्व विभाग की मिली भगत से अब पंजाब सरकार को 500 करोड़ से ज्यादा का चूना लगना तय है। 
(निर्माण अधीन शाहपुर कंडी बांध परियोजना)
यह खुलासा तब हुआ जब शाहपुर कंडी बांध प्रशासन ने अधिगृह नही की गई जमीन को जल सत्रोत विभाग से अधिगृह करने की इजाजत मांगी जिस पर सारी स्थिति को देखते हुये शाहपुर कंडी बैराज के लिए लगभग 36 ऐकड़ रकबे को अधिगृहित करने से पहले पंजाब सरकार के जल स्त्रोत विभाग के प्रमुख सचिव सर्वजीत सिंह आईएएस ने आदेश जारी किए है कि रावी नदी के किनारे वहां के विभिन्न लोगों की और से बनाई इमारतों की पूरी स्थिति की फोटोग्राफी व वीडियोग्राफी करके इसी माह पूरी रिपोर्ट भेजने के लिए कहा है, जिसके लिए पंजाब सरकार के जल स्त्रोत विभाग ने 11 सदस्यीय उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया है। जिस मे जिला डिप्टी कमीश्नर पठानकोट कमेटी के चेयरमैन, जिला अधिवक्ता अधिकारी,डीसी आर एंड आर,एसडीएम धार कलां, भूमि जिला अधिग्रहण अधिकारी, जिला माल अधिकारी, पावर कॉम विभाग के अधिकारी, एसई ऐडमन रणजीत सागर बांध , बीडीपीओ धार कलां, शाहपुर कंडी डैम मंडल के अधिकारी, एसई शाहपुर कंडी डैम व अन्य अधिकारियों को बतौर सदस्य शामिल किया है।
पंजाब सरकार ने अपने आदेश में जारी किया है कि उक्त लोगों ने इस शेष रहती 36 ऐकड भूुमि पर किस अधिकारी से मंजूरी ले कर इमारतों को बनाया है । इसके साथ ही नदी के किनारे उक्त इमारते बनाने के लिए नदी में अवैध खनन कर किस मार्ग के माध्यम से उक्त इमारतें बनाने के लिए कार्य किया है । जानकारी अनुसार रावी नदी के किनारे बहुत से बांध कर्मचारियों, साथ लगते गांवों व अन्य लोगों की और से उक्त बची हुई भूमि के छोटे टुकड़े करके वहां पर इमारतें बनाई है। जिस के लिए उनकी पूरी सही रिहायश, उनके वोटर कार्ड, बिजली के मीटरों तथा वहां पर बनाने के मकसद की जांच के लिए आदेश दिए है।
कमेटी को छह बिंदुयों पर विशेष जांच के लिए कहा है। कमेटी अधिग्रहण होने वाली भूमि का निरिक्षण करके उसकी पूरी फोटोग्राफी व वीडियोग्राफी अधिकारियों की मौजूदगी में करें। जिन लोगों ने रावी नदी के उक्त रकबो पर इमारतें है उनका बनाने का मकसद क्या है। कमेटी आर एंड आर पालिसी के तहत इन बनी हुई इमारतों को क्या नाम देगी तथा जिन लोगों की भूमि अधिग्रहण करनी है, उनको किस प्रकार मुआवजा देना है, जिससे भविष्य में कोई कानूनी अडचन न बन सके। डैम औसती के लिए बनाई हुई आर एंड आर पालिसी को संशोधन करने की क्या योजना है ताकि भविष्य में कोई कानूनी अडचन पैदा न हो सके। इसी के साथ, कमेटी यहां पंजाब सरकार का वित्तिय व लीगल पक्ष पर बैठक करके, पूरी स्थिति की रिपोर्ट तैयार करें। उन्होनें बताया है कि इसी माह के भीतर पूरी रिपोर्ट तैयार करके भेजा जाए ताकि आगामी कार्रवाई शुरू की जाए।
वहीं जिला माल अधिकारी अरविंद्र प्रकाश वर्मा ने बताया कि केवल रोजगार व मुआवजा लेने के मकसद से बनाए गए बिना स्वीकृति के बनाई इमारतों की पूरी स्थिति की जानकारी सरकार को भेजी जाएगी, जिसपर सरकार के आदेशों अनुसार ही आगामी कार्रवाई होगी। दूसरी तरफ बैराज औसती संघर्ष कमेटी के प्रधान दयाल सिंह ने बताया कि रावी नदी के किनारे केवल वहां पर राजनेताओं बांध कर्मचारियों, अधिकारियों व अन्य लोगों की और से सरकार को चूना लगाने के लिए आपसी मिलीभुगत करके निर्माण किए है। उन्होनें बताया कि अभी तक लगभग 800 से अधिक एक,दो मरला के हिसाब से इंतकाल तथा 250 से अधिक इमारतों का निर्माण हो चुका है। यदि पंजाब सरकार ने उक्त बनाए हुई इमारतों के मालिकों व भूमि के मालिको रोजगार देने के लिए कार्य किया तो इसके लिए बड़ से बड़ा संघर्ष करेगेंं तथा इस महाघोटाले का पूरा पर्दापाश करेगे।
इस मौके पर बैराज बांध प्रशासन के चीफ इंजीनियर एसके सलुजा ने बताया है कि बैराज बांध परियोजना की और से 406 मीटर तक कैचमैंट एरीया बनाने की योजना है, जिसके लिए शाहपुर कंडी रावी नदी के किनारे 25 ऐकड भूमि, तरेहटी टीके से 4 ऐकड, कोट टिका मैरा से 3 ऐकड, कोट टिका खास से 2 ऐकड, थड़ा चिकला से लगभग एक एकड तथा सभी स्थानों से कुल लगभग 34 ऐकड भूमि को अधिग्रहित करना है तथा विभाग की ओर से मांगी गई जानकारी जल्द विभाग को भेजी जा रही है।
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