CANADIAN DOABA TIMES : सांसद निधि को 2 सालों के लिए निलंबित करना अन्याय प्रतीत होता है, यह एक बीमार सोच का फैसला लगता है- सांसद मनीष तिवारी

सांसद तिवारी ने प्रधानमंत्री मोदी को लिखा पत्र; सांसद निधि निलंबित करने को अन्याय बताया
कहा: कोविड-19 से लड़ाई में अन्य व्ययों पर भी हो सकता है विचार
नवांशहर, 9 अप्रैल:(Bureau Chief Saurav Joshi) श्री आनंदपुर साहिब सेने केंद्रीय कैबिनेट की ओर से हाल ही में सांसदों के वेतन में कटौती करने और सांसद निधि को 2 सालों के लिए निलंबित करने के फैसले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखा है। उन्होंने सांसद निधि निलंबित करने के फैसले को अन्याय करार देते हुए, व्ययों की प्राथमिकताओं पर पुनःविचार करने का सुझाव दिया है।
प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में सांसद तिवारी ने कहा है कि वह सांसदों के वेतन में 30% की कटौती का कारण तो समझ सकते हैं, लेकिन सांसद निधि को 2 सालों के लिए निलंबित करना अन्याय प्रतीत होता है। यह एक बीमार सोच का फैसला लगता है, जिस पर प्रतिक्रिया आनी लाजमी थी। जिस प्रकार लॉकडाउन के लिए दिए 4 घण्टों के नोटिस ने गरीब, पिछड़े, जरूरतमंद लोगों को परेशानी में डाल दिया और परिणाम सबके सामने हैं। ऐसे में कोविड-19 से लड़ने में कई अन्य व्ययों पर भी विचार किया जा सकता है।
तिवारी ने खुलासा किया कि संसद ने हाल ही में 30.42 लाख करोड़ रुपये का बजट पास किया था। हालांकि प्राप्तियां अनुमान से कम हो सकती हैं और फिजीकल रिपोंसेबिलिटी एंड बजट मैनेजमेंट (एफ.आर. बी.एम) एक्ट के तहत बजटीय घाटे की लिमिट में हमेशा छूट दी जा सकती है। ऐसे में क्या वास्तव में बीमारी से बचाव, रोकथाम, ईलाज और इन्फ्रास्ट्रक्चर पर खर्च इतना बढ़ गया है। हम वित्तीय वर्ष के शुरुआती चरण में हैं। जबकि हाल ही में सम्पूर्ण हुए संसदीय सत्र में वित्त मंत्री ने दोनों सदनों को भरोसा दिया था कि सरकार की वित्तीय स्थिति ठीक है और सैद्धान्तिक रूप से अर्थव्यवस्था बहुत मजबूत हैं। उन्हें भरोसा है कि वित्त मंत्री मात्र दो सप्ताह बाद यह नहीं समझ रही हैं कि हालात बदल गए हैं और सरकार के पक्ष में नाटकीय बदलाव की जरूरत है। क्या सरकार जरूरत से अधिक बर्ताव कर रही थी या फिर उसने संसद और देश के लोगों से कुछ छिपाया है? क्या कोई घबराने की जरूरत है?
यहां तक कि प्राथमिकताओं को बदला जा सकता है। जिसके उदाहरण के तौर पर 20 हजार करोड़ रुपये की भारी लागत से राजपथ पर सेंट्रल विस्ता को पुनः विकसित करने की योजना को टालकर उन पैसों को कोविड-19 से लड़ने में बरता जा सकता है। इसी तरह, सरकारी इश्तिहार पर खर्च को भी विचारा जा सकता है। 
इसके अलावा, सरकारी खर्च से जुड़े क्षेत्रों की पहचान करके उनमें कटौती करने या तर्कसंगत बनाने के लिए कमेटी बनाई जा सकती है और आखिर में जाकर एमपीलैड को छुआ जाना चाहिए। 
उन्होंने जोर देते हुए कहा कि सांसद निधि जन प्रतिनिधियों के पास जरूरत पड़ने पर छोटे स्तर पर समस्या के निवारण हेतु एक आसानी से उपलब्ध औजार की तरह होता है। यह समाज के ज़रूरतमंद वर्गों की मदद के लिए अति जरूरी है। ऐसे में वह आपसे 2 सालों के लिए एमपीलैड को निलंबित करने बारे लिए फैसले पर पुनःविचार करने की अपील करते हैं। इससे कोविड-19 के खिलाफ जंग में मदद नहीं मिलेगी, बल्कि इस जंग को ही नुकसान पहुंचेगा।
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